सच बात करें तो हम में से ज़्यादातर लोग सुबह बिस्तर से उठने से पहले ही फोन उठा लेते हैं। खाना खाते वक्त मैसेज चेक करते हैं, सोने से पहले सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं, और जब फोन नहीं मिलता तो घबराहट होने लगती है। क्या यह आपको भी होता है?
आप अकेले नहीं हैं। और इसका एक हल है जिसे कहते हैं: डिजिटल डिटॉक्स।
तो डिजिटल डिटॉक्स होता क्या है?
डिजिटल डिटॉक्स का मतलब है कि आप एक तय समय के लिए अपने डिवाइस से दूरी बना लें। इसमें फोन, लैपटॉप, टैबलेट या सोशल मीडिया, इनसे पूरी तरह दूर रहना या बस इनका कम इस्तेमाल करना शामिल हो सकता है।
यह कोई कठोर नियम नहीं है। कुछ लोग सब कुछ बंद कर देते हैं। कुछ लोग सिर्फ सोशल मीडिया की एक दिन की सीमा तय करते हैं। जो भी करें, बात यह है कि आप जानबूझकर अपने डिवाइस का कम इस्तेमाल करने का फैसला ले रहे हैं।
इतने लोग थके हुए क्यों हैं?
हमारा दिमाग इतनी ज़्यादा जानकारी के लिए नहीं बना था। हर दिन नोटिफिकेशन, खबरें, मैसेज और सोशल मीडिया अपडेट का एक अंतहीन सिलसिला चलता रहता है। यह कभी रुकता नहीं।
कुछ आम वजहें जिनसे लोग डिवाइस से थका हुआ महसूस करते हैं:
- फोन पर ऐप्स, ईमेल और मैसेज के नोटिफिकेशन बार-बार आते रहते हैं
- सोशल मीडिया पर दूसरों से अपनी तुलना करना मन को परेशान करता है
- काम घर तक पीछा करता है क्योंकि फोन हमेशा हाथ में होता है
- देर रात तक गेम खेलना या वीडियो देखना नींद बर्बाद करता है
- एक साथ कई ऐप्स और डिवाइस पर काम करने से ध्यान भटकता है
धीरे-धीरे यह सब जमा होता जाता है। आप थका हुआ, बेचैन और कम ध्यान लगा पाने वाला महसूस करने लगते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2020 में इसे एक असली समस्या के रूप में माना।
कैसे पता चलेगा कि आपको ब्रेक की ज़रूरत है?
इन बातों पर ध्यान दें:
- बिना किसी खास वजह के बार-बार फोन चेक करते हैं
- फोन न मिले तो बेचैनी या घबराहट होती है
- सोशल मीडिया देखने के बाद उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस होता है
- स्क्रीन की वजह से नींद खराब हो रही है
- परिवार या दोस्तों के साथ समय की जगह फोन को ज़्यादा अहमियत देते हैं
- किसी एक काम पर ध्यान लगाना मुश्किल लगता है
- सामने बैठकर बात करने की जगह मैसेज करना ज़्यादा पसंद है
अगर इनमें से कई बातें आप पर लागू होती हैं, तो डिजिटल डिटॉक्स आपके लिए सही कदम हो सकता है।
इसके क्या फायदे हैं?
डिवाइस से असली ब्रेक लेने के कई फायदे हैं:
बेहतर नींद। स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी आपके शरीर की नींद की प्राकृतिक घड़ी को बिगाड़ देती है। रात को स्क्रीन टाइम कम करने से आप जल्दी सो जाते हैं और नींद गहरी आती है।
कम तनाव और बेचैनी। लगातार नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करना आपका तनाव बढ़ाती रहती है। इनसे दूर रहने पर दिमाग को आराम मिलता है।
बेहतर ध्यान। जब आप ऐप्स और नोटिफिकेशन के बीच उछलना बंद करते हैं, तो ध्यान लगाने की क्षमता वापस आती है। काम आसान लगने लगता है और आप ज़्यादा कर पाते हैं।
रिश्ते मज़बूत होते हैं। जब आपका ध्यान स्क्रीन पर नहीं होता, तो आप अपने आसपास के लोगों के साथ सच में मौजूद रहते हैं। बातचीत बेहतर होती है।
पसंदीदा कामों के लिए वक्त मिलता है। पढ़ना, कसरत, कोई शौक, बाहर घूमना, इन सबके लिए वक्त निकल आता है।
दिमाग साफ रहता है। जब दिमाग को लगातार जानकारी से ब्रेक मिलता है, तो आप ज़्यादा साफ सोच पाते हैं, समस्याएं बेहतर हल कर पाते हैं और क्रिएटिविटी भी बढ़ती है।
डिजिटल डिटॉक्स कैसे करें?
फोन को नदी में फेंकने की ज़रूरत नहीं है। छोटे-छोटे बदलाव भी उतने ही कारगर होते हैं। शुरुआत इस तरह करें:
- अपना लक्ष्य तय करें। खुद से पूछें, यह क्यों करना है? बेहतर नींद के लिए? कम बेचैनी के लिए? परिवार के साथ ज़्यादा वक्त बिताने के लिए? साफ लक्ष्य होने पर टिके रहना आसान होता है।
- तय करें क्या कम करना है। हो सकता है आप एक हफ्ते के लिए सोशल मीडिया बंद करें, रोज़ाना स्क्रीन टाइम की सीमा लगाएं, या सोने के कमरे में फोन न ले जाएं। जो भी करें, वो असल में हो सके वैसा हो।
- छोटे से शुरू करें। पहले दिन ही पूरे महीने का डिटॉक्स नहीं करना है। पहले एक घंटे बिना फोन के रहें, फिर एक सुबह, फिर पूरा दिन। धीरे-धीरे बढ़ाएं।
- लोगों को बताएं। दोस्तों, परिवार या साथ काम करने वालों को बताएं कि आप थोड़े वक्त के लिए कम उपलब्ध रहेंगे। इससे कोई परेशान नहीं होगा और आप पर जवाब देने का दबाव भी नहीं रहेगा।
- कुछ और करने की योजना बनाएं। जब भी बोर होने पर फोन उठाने की आदत हो, उसकी जगह कुछ और रखें। टहलने जाएं, किताब पढ़ें, किसी से बात करें, पालतू जानवर के साथ खेलें, या कोई नया शौक अपनाएं।
- सोने के कमरे को स्क्रीन-फ्री बनाएं। यह एक बदलाव अकेले ही आपकी नींद में बड़ा फर्क ला सकता है।
- खुद का जायज़ा लें। एक या दो हफ्ते बाद अपने आप से पूछें कि कैसा महसूस हो रहा है। तनाव कम हुआ? नींद बेहतर हुई? इससे जो सीखें उससे आगे की आदतें बनाएं।
काम पर डिजिटल थकान कम करने के तरीके
अगर आप काम के लिए कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं, तो पूरा डिटॉक्स शायद मुमकिन न हो। लेकिन फिर भी आप थकान कम कर सकते हैं:
- ईमेल तय समय पर चेक करें, हर कुछ मिनट में नहीं
- जो नोटिफिकेशन ज़रूरी नहीं हैं उन्हें बंद करें
- विचार और काम की सूची कागज़ पर लिखें
- हर घंटे में पांच मिनट स्क्रीन से दूर रहें
बच्चों और किशोरों के बारे में क्या?
ज़्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों और किशोरों पर खासा असर पड़ता है। इससे उनकी पढ़ाई, नींद और असली दोस्ती पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। अगर आप माता-पिता हैं, तो आप बाहर खेलने को बढ़ावा दें, स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें, और खुद भी अच्छी आदतें दिखाएं। बच्चे बड़ों को देखकर सीखते हैं।
कितने समय के लिए करें?
इसका कोई एक सही जवाब नहीं है। कुछ लोग हफ्ते में एक दिन डिवाइस से दूर रहते हैं। कुछ दो हफ्ते के लिए सोशल मीडिया बंद कर देते हैं। एक शोध में पाया गया कि सिर्फ दो हफ्ते तक सोशल मीडिया को रोज़ाना 30 मिनट तक सीमित रखने से भी अच्छा फर्क पड़ा। जो आपके लिए संभव हो उससे शुरू करें और धीरे-धीरे आगे बढ़ें।
आखिरी बात
टेक्नोलॉजी हमेशा के लिए छोड़ने की ज़रूरत नहीं है। बस इतना काफी है कि आप इसे अपनी शर्तों पर इस्तेमाल करें, न कि यह आपका दिन चलाए। एक छोटा सा डिजिटल डिटॉक्स भी आपकी नींद बेहतर कर सकता है, मन को शांत कर सकता है, ध्यान बढ़ा सकता है और ज़िंदगी को थोड़ा और अच्छा बना सकता है।
बस एक योजना चाहिए, थोड़ी सी प्रतिबद्धता, और शायद फोन को मेज़ पर छोड़कर एक चक्कर बाहर का।
स्रोत:
https://www.healthline.com/health/digital-detox
https://www.brownhealth.org/be-well/what-digital-detox-and-do-you-need-one
https://www.maxhealthcare.in/blogs/digital-detox-for-mental-health